महफिले शायरी

इस ब्लॉग पर शायरी की किसी भी विधा -गज़ल,नज़्म , एकल शेर व गीत में शौक फरमाने वाले शायर,गीतकार अपने फन अपनी अदबकारी का इज़हार कर सकते हैं ! इच्छुक लेखक /पाठक सदस्य बनकर ब्लॉग में अपनी रचनाएँ पोस्ट कर सकतें हैं ! आप ईमेल के माध्यम से भी प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेज सकतें हैं --अश्विनी रमेश !

शुक्रवार, 23 मई 2014


प्रस्तुतकर्ता Ashwini Ramesh पर 12:36 am 0 टिप्पणियाँ
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
पुराने पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें टिप्पणियाँ (Atom)
Powered By Blogger

Facebook Badge

जीवन -एक बूँद पानी की सतत यात्रा

Promote your Page too

कुल पेज दृश्य

Recent Posts

Facebook Badge

Ashwini Ramesh

Create your badge

महफिले शायरी

लोड हो रहा है. . .

पृष्ठ

  • मुखपृष्ठ

ब्लॉग आर्काइव

  • ▼  2014 (1)
    • ▼  मई (1)
  • ►  2013 (3)
    • ►  नवंबर (1)
    • ►  अक्टूबर (1)
    • ►  अगस्त (1)
  • ►  2012 (33)
    • ►  अगस्त (2)
    • ►  जून (9)
    • ►  अप्रैल (1)
    • ►  मार्च (4)
    • ►  फ़रवरी (7)
    • ►  जनवरी (10)
  • ►  2011 (7)
    • ►  दिसंबर (7)

यह ब्लॉग खोजें

मेरी ब्लॉग सूची

  • Poetry--A Blend of Real, Natural and the Mystic.
    -
    11 वर्ष पहले
  • The World of Creative Writing.
    महफिले शायरी: *****उनके शहर से हम चले जब जाएंगे***** -
    14 वर्ष पहले
  • सहज अभिव्यक्ति—रचनात्मक साहित्यिक, दार्शनिक एवम आध्यात्मिक अभिव्यक्ति मंच | साहित्यिक,दार्शनिक,आध्यात्मिक एवम सांस्कृतिक-कलात्मक अभिव्यक्ति मंच
    इस ब्लॉग पर स्वागत है— - साहित्यिक दार्शनिक एवम आध्यात्मिक लेखकों का जो लेखन के प्रति गंभीर ओर समर्पित हैं ,का इस ब्लॉग पर उपयोगकर्ता के रुप में हार्दिक स्वागत है !
    14 वर्ष पहले

लोकप्रिय पोस्ट

  • नये साल का इस्तकबाल करते मेरे शेर-अश्विनी रमेश
    नये साल की खुशी बांटेंगे हम गमों की सब जंजीरें काटेंगे हम जो भी आएंगे गुलशन में हमारे खुशियाँ सबके ही संग बाँटेंगे हम ! --अश्विनी रमेश ...
  • सुबीर संवाद सेवा --
    सुबीर संवाद सेवा --हिदी जगत के लोकप्रिय उक्त ब्लॉग पर ईद के अवसर पर आयोजित मुशायरे में मेरी गज़ल भी पढें ! ब्लॉग लिंक पर क्लिक करें !
  • बर्बादी
    बदनाम न हो जाये तेरा नाम मैं चुप ही रहता हूँ , यूँ तो लोग रोज मुझसे मेरी बर्बादी का सबब पूछते हैं.  लेखक:अश्वनी भारद्वाज 
  • जान की तरह ...
    जिस्म में रहते थे कभी जान की तरह, अब अपनें घर में हैं मेहमान की तरह !! इंतज़ार नें महरूम रक्खा, शाम होते ही, वो दिल अपना बढ़ा गए दुकान की तर...
  • तेरे खुआब
    मुझे भी तेरे खुआब  देखने  का शौंक  है .. कहदो न अपनी यादों से मुझे सोने दिया करें ..लेखक अश्वनी भारद्वाज 
  • मिज़ाजे मौसम अब बदलता जा रहा है--गज़ल
    मिज़ाजे मौसम अब बदलता जा रहा है हवाओं का रुख अब बिगड़ता जा रहा है तबीयत तुम अब तो हमारी बस न पूछो दिले नाज़ुक अब तो बिखरता जा रहा है कही...
  • सुबीर संवाद सेवा: तरही के समापन से ठीक पहले का ये अंक जिसमें श्री अश्विनी रमेश जी की एक ग़ज़ल और आदरणीया लावण्‍या शाह जी की मुक्‍त छंद कविता ।
    सुबीर संवाद सेवा: तरही के समापन से ठीक पहले का ये अंक जिसमें श्री अश्विनी रमेश जी की एक ग़ज़ल और आदरणीया लावण्‍या शाह जी की मुक्‍त छंद कविता...
  • उदासी में कुछ भी नहीं सुहाता है
    उदासी में कुछ भी नहीं सुहाता है मंजर दिलकश भी नहीं लुभाता है !!   बैचेनियाँ जब इस कदर घेरतीं हैं मज़ा सा ज़िंदगी का नहीं आता है...
  • ओ पवन उनकी हथेली की छुअन लाना कभी--गीत द्वारा सतीश अग्रवाल ,फरीदाबाद
                                                                      ओ पवन उनकी हथेली की छुअन लाना कभी आये जब होली तो मेरे मुख पे मल जाना क...
  • एक सूरज से वो अबर में छुप गये--गीत द्वारा सतीश अग्रवाल
    एक सूरज से वो अबर में छुप गये मैं अंजुलि में लिये जल खड़ा रह गया जैसे आँसू निकलकर कोई आँख से ओस की तरह मुख पे पड़ा रह गया जाने किसने है ...

योगदान देने वाला व्यक्ति

  • ..L.R.Jhinghta
  • Arunjeet Thakur 'Nishaat Laasaani'
  • Ashwini Ramesh
  • Unknown
  • prikshat

फ़ॉलोअर

सदस्यता लें

संदेश
Atom
संदेश
सभी टिप्पणियां
Atom
सभी टिप्पणियां
konradlew के थीम चित्र. Blogger द्वारा संचालित.